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राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' का अर्थ और इतिहास

राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' का अर्थ और इतिहास


राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् को हमारे देश में बहुत महत्व दिया जाता है।

यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया तथा इस गीत को बंकिमचन्द्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ से लिया गया था तथा इसका प्रकाशन सन् 1882 में हुआ था।

उसके बाद स्वतंत्रता मिलने के बाद 24 जनवरी 1950 में इस गीत को राष्ट्रीय गीत के रूप में संविधान सभा में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्वीकार कर लिया गया।

🇮🇳 वन्दे मातरम् 🇮🇳

सुजलां सुफलां मलयजशीतलां
शस्यश्यामलां मातरम्!
शुभ-ज्योत्सना-पुलकित-यामिनीम्
फुल्ल-कुसुमित-द्रमुदल शोभिनीम्
सुहासिनी सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्!

सन्तकोटिकंठ-कलकल-निनादकराले
द्विसप्तकोटि भुजैर्धृतखरकरबाले
अबला केनो माँ एतो बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदल वारिणीं मातरम्!

तुमि विद्या तुमि धर्म
तुमि हरि तुमि कर्म
त्वम् हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति
हृदये तुमि मा भक्ति
तोमारइ प्रतिमा गड़ि मंदिरें-मंदिरे।

त्वं हि दूर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमल-दल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी नवामि त्वां
नवामि कमलाम् अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम
धमरणीं भरणीम् मातरम्।

🇮🇳 वन्दे मातरम् का हिंदी में अर्थ 🇮🇳

०१- हे माँ मैं तेरी वन्दना करता हूँ
तेरे अच्छे पानी, अच्छे फलों,
सुगन्धित, शुष्क, उत्तरी समीर (हवा)
हरे-भरे खेतों वाली मेरी माँ।

०२- सुन्दर चाँदनी से प्रकाशित रात वाली,
खिले हुए फूलों और घने वृ़क्षों वाली,
सुमधुर भाषा वाली,
सुख देने वाली वरदायिनी मेरी माँ।

०३- तीस करोड़ कण्ठों की जोशीली
आवाज़ें,
साठ करोड़ भुजाओं में तलवारों को
धारण किये हुए
क्या इतनी शक्ति के बाद भी,
हे माँ तू निर्बल है,
तू ही हमारी भुजाओं की शक्ति है,
मैं तेरी पद-वन्दना करता हूँ मेरी माँ।

०४- तू ही मेरा ज्ञान, तू ही मेरा धर्म है,
तू ही मेरा अन्तर्मन, तू ही मेरा लक्ष्य,
तू ही मेरे शरीर का प्राण,
तू ही भुजाओं की शक्ति है,
मन के भीतर तेरा ही सत्य है,
तेरी ही मन मोहिनी मूर्ति
एक-एक मन्दिर में,

०५- तू ही दुर्गा दश सशस्त्र भुजाओं वाली,
तू ही कमला है, कमल के फूलों की बहार,
तू ही ज्ञान गंगा है, परिपूर्ण करने वाली,
मैं तेरा दास हूँ, दासों का भी दास,
दासों के दास का भी दास,
अच्छे पानी अच्छे फलों वाली मेरी माँ,
मैं तेरी वन्दना करता हूँ।

०६- लहलहाते खेतों वाली, पवित्र, मोहिनी,
सुशोभित, शक्तिशालिनी, अजर-अमर
मैं तेरी वन्दना करता हूँ।

लाल किले पर पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’ 🇮🇳

आजादी के बाद पहली बार लाल किले के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति होने जा रही है।

अब तक क्यों नहीं गाया जाता था?

1937 में ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो छंदों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल करने का फैसला हुआ था। आगे के छंदों में देवी दुर्गा और धार्मिक प्रतीकों के उल्लेख को लेकर उस समय विवाद हुआ था।

1950 में क्या हुआ?

‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया। सरकारी समारोहों के प्रोटोकॉल में राष्ट्रगान को प्राथमिक स्थान मिला।

2026 में बड़ा बदलाव

राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद अब ‘वंदे मातरम’ को भी आधिकारिक समारोह में शामिल किया जा रहा है।

15 अगस्त 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले लाल किले पर ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति होगी और इसके बाद परंपरा के अनुसार ‘जन गण मन’ भी समारोह का हिस्सा रहेगा।

🇮🇳 वंदे मातरम्! जय हिंद! 🇮🇳

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