सूर्य के चारों ओर दिखाई देने वाला प्रभामंडल (Sun Halo) एक सुंदर प्रकाशीय घटना (Optical Phenomenon) है। यह तब बनता है जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में मौजूद बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टलों से होकर गुजरता है।
Sun Halo बनने का मुख्य कारण
ऊँचाई पर मौजूद पतले बादल, विशेषकर सिरोस्ट्रेटस (Cirrostratus) बादल, में छोटे-छोटे षट्कोणीय (Hexagonal) बर्फ क्रिस्टल होते हैं।
जब सूर्य का प्रकाश इन क्रिस्टलों से गुजरता है तो वह:
- अपवर्तित (Refraction) होता है
- थोड़ा मुड़ जाता है
- और विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है
इससे सूर्य के चारों ओर गोलाकार चमकीला घेरा दिखाई देता है, जिसे Halo कहते हैं।
22° Halo
सबसे सामान्य Sun Halo लगभग 22 डिग्री के कोण पर बनता है।
इसी कारण इसे 22° Halo भी कहा जाता है।
Halo बनने की प्रक्रिया
- ऊँचाई पर बर्फ वाले पतले बादल बनते हैं
- सूर्य का प्रकाश बर्फ क्रिस्टलों में प्रवेश करता है
- प्रकाश अपवर्तित होकर मुड़ता है
- एक वृत्ताकार चमकीला घेरा दिखाई देता है
क्या यह मौसम परिवर्तन का संकेत है?
हाँ, कई बार Sun Halo आने वाले मौसम परिवर्तन का संकेत माना जाता है।
क्योंकि Cirrostratus बादल अक्सर:
- वर्षा प्रणाली,
- पश्चिमी विक्षोभ,
- या तूफानी मौसम
के आने से पहले दिखाई देते हैं।
रोचक तथ्य
- रात में चंद्रमा के चारों ओर भी ऐसा घेरा बन सकता है, जिसे Moon Halo कहते हैं।
- Halo के किनारों पर हल्के इंद्रधनुषी रंग भी दिख सकते हैं।