सीधी कमर, बेहतर काम: सही बैठने से मूड, फैसले और आत्मविश्वास में सुधार Straight Back, Better Work: Proper Sitting Improves Mood, Decision-Making, and Confidence
बैठने के तरीके के असर पर रिसर्च: सीधे बैठने वालों ने जोखिम के काम में अच्छे नतीजे हासिल किए
कुर्सी पर सीधे बैठने से मूड बेहतर व फैसले लेने की क्षमता में सुधार होता है; कार्यस्थल पर प्रोडक्शन बढ़ता है... और आत्मविश्वास भी बना रहता है
भास्कर न्यूज़ | वॉशिंगटन
अगर आप ऑफिस या घर में काम करते वक्त कुर्सी पर झुककर या सुस्त होकर बैठते हैं, तो यह आदत तुरंत बदल लीजिए, क्योंकि कुर्सी पर बैठने का तरीका केवल शरीर की मुद्रा नहीं, मानसिक स्थिति और फैसले लेने के तरीके को भी प्रभावित करता है। कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस बारे में बड़ा खुलासा किया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, सिर्फ सीधे बैठकर काम करने से ही आपका मूड बेहतर हो सकता है और आप जीवन में ज्यादा सही व सटीक फैसले ले सकते हैं। ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी में पाया गया कि बैठने का सही पॉश्चर (मुद्रा) न केवल शारीरिक आराम देता है, बल्कि यह हमारे दिमाग के काम करने के तरीके को भी गहराई से प्रभावित करता है।
मैकगिल यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जॉर्ज अरमोनी और शोधकर्ता सोरेन वेनियो-थे बर्ज की टीम ने बैठने के तरीके के असर पर अध्ययन किया। जिस पर अध्ययन किया गया, उन्हें रिसर्च का सही उद्देश्य नहीं बताया गया था, ताकि वे स्वाभाविक व्यवहार करें। उन्हें टैबलेट पर काम करने को दिया गया।
एक ग्रुप के लिए टैबलेट स्टैंड और टेबल की ऊंचाई ऐसे सेट की गई कि उन्हें सीधा बैठना पड़ा। दूसरे ग्रुप का सेटअप ऐसा था कि उन्हें झुककर काम करना पड़ा। शोध में शामिल लोगों को वर्चुअल बैलून गेम खिलाया गया, जिसमें गुब्बारे में हवा भरकर ज्यादा से ज्यादा रिवॉर्ड जीतना था।
जिन लोगों का पॉश्चर एकदम सीधा (अपराइट) था, उन्होंने समझदारी भरा रिस्क लिया और ज्यादा रिवॉर्ड हासिल किए। वहीं, झुककर बैठने वाले लोग डरे नजर आए।
पॉश्चर का असर दिमाग को चौकन्ना रखने पर भी पड़ता है
हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की प्रसिद्ध शोधकर्ता एमी कड्डी ने अपनी ‘पावर पोजिंग रिसर्च’ में बताया था कि हमारी शारीरिक मुद्रा से शरीर में कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) घटता है और टेस्टोस्टेरोन का स्तर संतुलित रहता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, सीधे बैठने से फेफड़ों को फैलने की पूरी जगह मिलती है, जिससे दिमाग को 30% तक ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है और सुस्ती दूर होती है। इसलिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन हमेशा आंख के स्तर पर रखें। काम करते वक्त रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और हर 45 मिनट में ब्रेक लें।
गर्व और आत्मविश्वास का एहसास
गेम के बाद प्रश्नावली में सामने आया कि सीधे बैठने वाले लोगों ने गर्व और सकारात्मकता की ज्यादा मजबूत भावना महसूस की। स्टडी के मुख्य लेखक जॉर्ज अरमोनी का कहना है, “हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि जब स्थान की वजह से इंसान का पॉश्चर बदलता है, तो उसके मूड व जोखिम लेने की क्षमता पर अच्छा असर पड़ता है।”
इसका सीधा मतलब है कि ऑफिस में कुर्सी, मेज, कंप्यूटर और काम करने का तरीका कर्मचारी के शरीर के अनुरूप हो, क्योंकि इसका असर सिर्फ कर्मचारियों के पीठ दर्द तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी निर्णय क्षमता को भी प्रभावित करता है।
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